सैफई : खरीफ सीजन की शुरुआत और हाल ही में हुई बारिश के बाद क्षेत्र में ढैंचा बीज की मांग अचानक बढ़ गई है। खेतों में पर्याप्त नमी आने के चलते किसान हरी खाद के रूप में प्रयोग होने वाले ढैंचा की बुवाई के लिए तैयारी में जुटे हैं, लेकिन सैफई ब्लॉक स्थित राजकीय कृषि बीज भंडार केंद्र की व्यवस्था पूरी तरह चरमराई दिखाई दे रही है। सरकारी केंद्र पर बीज उपलब्ध न होने और वितरण प्रक्रिया ठप रहने से किसान निजी दुकानों से महंगे दामों पर बीज खरीदने को मजबूर हैं।
शासन की नई व्यवस्था के तहत अब किसानों को पहले ऑनलाइन पंजीकरण और बुकिंग करानी पड़ रही है। इसके बाद लॉटरी सिस्टम के माध्यम से चयन होने पर ही बीज वितरण किया जाना है। यही व्यवस्था अब किसानों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। सैफई स्थित राजकीय कृषि बीज भंडार केंद्र पर कई दिनों से बीज वितरण शुरू नहीं हो सका है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में किसान केंद्र पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें कभी साइट बंद होने, कभी निर्देश न आने और कभी कर्मचारी के बाहर होने का हवाला देकर वापस भेजा जा रहा है।
सोमवार को भी राजकीय कृषि बीज भंडार सैफई पर ताला लटका मिला। वहीं पास स्थित उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी कार्यालय में कर्मचारी मौजूद रहे, लेकिन बीज वितरण नहीं हो सका। केंद्र पर पहुंचे किसानों को बताया गया कि अभी ऊपर से लॉटरी सिस्टम नहीं खोला गया है। चयन होने के बाद ही बीज उपलब्ध कराया जाएगा।
क्षेत्र में इस समय ढैंचा की मांग सबसे अधिक बनी हुई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बारिश के तुरंत बाद ढैंचा की बुवाई खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है। समय निकलने के बाद इसका लाभ कम हो जाता है। ऐसे में बीज वितरण में देरी सीधे खेती की तैयारी को प्रभावित कर रही है।
राजकीय कृषि बीज भंडार के प्रभारी यतेंद्र कुमार के केंद्र पर मौजूद न रहने को लेकर भी किसानों में नाराजगी है। आरोप है कि प्रभारी अधिकतर समय केंद्र से बाहर रहते हैं और अंगूठा लगाने वाली मशीन भी अपने साथ लेकर चले जाते हैं। इससे ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती और किसान घंटों इंतजार के बाद वापस लौटने को मजबूर हो रहे हैं।
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नगला बरी निवासी शैलेंद्र कुमार ने बताया कि कई बार केंद्र पर जाने के बाद भी बीज नहीं मिला। केंद्र पर ताला लटका रहता है और लॉटरी सिस्टम खुलने का इंतजार करने को कहा जाता है। बारिश के बाद खेत तैयार पड़े हैं और समय निकलने पर नुकसान बढ़ जाएगा। मजबूरी में निजी दुकानों से महंगे दामों पर बीज खरीदना पड़ रहा है।
नगला सूरजमल निवासी किसान सुरेंद्र छोटे ने बताया कि केंद्र पर कर्मचारियों द्वारा कहा जाता है कि शासन के निर्देश के अनुसार फिलहाल बीज वितरण बंद है। ऊपर से आदेश मिलने के बाद ही बीज दिया जाएगा। ऐसे में किसान लगातार चक्कर लगाकर परेशान हो रहे हैं।
भारतीय किसान यूनियन के तहसील अध्यक्ष जावेद सिंह यादव ने कहा कि सरकार की ऑनलाइन और लॉटरी व्यवस्था किसानों के लिए नई समस्या बन गई है। समय पर बीज उपलब्ध न होने से किसान निजी दुकानों पर निर्भर हो रहे हैं, जहां उन्हें अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।
वर्जन —
इस संबंध में एड़ीओ कृषि प्रदीप कुमार ने बताया कि अभी ऊपर से निर्देश नहीं मिले हैं। निर्देश मिलते ही लॉटरी सिस्टम खोला जाएगा और चयनित किसानों को बीज उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन बुकिंग अधिक होने के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। फिलहाल सभी जगह यही व्यवस्था लागू है।
