चिकित्सक, शिक्षक और प्रशासक के रूप में स्थापित की अलग पहचान, कोविड संकट में भी निभाई अहम भूमिका
सैफई : मरीजों की सांसों को नई जिंदगी देना केवल एक चिकित्सकीय दायित्व नहीं, बल्कि समाज के प्रति समर्पण का सबसे बड़ा उदाहरण है। बदायूं जनपद के निवासी एवं उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई के चिकित्सा संकाय के डीन तथा रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) आदेश कुमार ने टीबी एवं श्वास रोग चिकित्सा को जनसेवा का माध्यम बनाकर यही पहचान स्थापित की है। पिछले दो दशक से अधिक समय से वह न केवल हजारों मरीजों का उपचार कर रहे हैं, बल्कि टीबी उन्मूलन, जनजागरूकता और चिकित्सा शिक्षा को भी नई दिशा दे रहे हैं।

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर से एमबीबीएस एवं एमडी करने के बाद वर्ष 2006 में सैफई से जुड़े प्रो. आदेश कुमार वर्तमान में चिकित्सा संकाय के डीन हैं। इससे पूर्व वह विश्वविद्यालय के चिकित्सा अधीक्षक भी रहे। कोविड-19 महामारी के दौरान उनके नेतृत्व में 200 बेड का समर्पित कोविड अस्पताल, 20 बेड का आईसीयू और कोविड सेंट्रल लैब स्थापित की गई। उन्होंने रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में ब्रोंकोस्कोपी, थोरेकोस्कोपी और पॉलीसोमनोग्राफी जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित कर मरीजों को उन्नत उपचार उपलब्ध कराया। साथ ही गांवों में टीबी जागरूकता अभियान, स्वास्थ्य शिविर और टीबी मुक्त गांव की अवधारणा को बढ़ावा देने में भी सक्रिय भूमिका निभाई। वह वर्तमान में राज्य क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) की स्टेट टास्क फोर्स के उपाध्यक्ष भी हैं।

चिकित्सा शिक्षा और शोध के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय है। उनके नाम 60 इंडेक्स्ड शोध प्रकाशन, आठ शोध परियोजनाएं तथा अनेक राष्ट्रीय चिकित्सा सम्मेलनों में फैकल्टी, चेयरपर्सन और वक्ता के रूप में सहभागिता दर्ज है। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें डॉ. एस. राधाकृष्णन मेमोरियल नेशनल टीचर अवॉर्ड, नेशनल सेवारत्न अवॉर्ड, यूनाइटेड एकेडमी ऑफ पल्मोनरी मेडिसिन फेलोशिप, आईएमए डॉक्टर्स डे सम्मान, दो कोरोना वॉरियर सम्मान सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।
