राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस विशेष-
दूसरों का दर्द कम करते-करते अपने दर्द को मुस्कान के पीछे छिपा लेने वाली एक समर्पित चिकित्सक की कहानी`
(लेखक : वी. पी. सिंह यादव सैफई -9058333340)
सैफई (इटावा) किसी अस्पताल के प्रसूति कक्ष में एक ओर नई जिंदगी जन्म ले रही होती है तो दूसरी ओर कई बार जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष चल रहा होता है। उस कठिन घड़ी में सबसे अधिक धैर्य, साहस और संवेदनशीलता जिस व्यक्ति की परीक्षा लेती है, वह डॉक्टर होता है। मरीज और उनके स्वजन अक्सर डॉक्टर की मुस्कान देखते हैं, लेकिन उसके पीछे छिपी अनगिनत जिम्मेदारियां, मानसिक दबाव, रातों की जाग और भावनात्मक संघर्ष बहुत कम लोग देख पाते हैं। राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस का उद्देश्य भी ऐसे ही समर्पित चिकित्सकों के मानवीय पक्ष को सामने लाना है। उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. वैभव कांती का जीवन इसी समर्पण, संघर्ष और सेवा की प्रेरक कहानी है।

उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद के ग्राम पूरा उर्फ फरहदा में जन्मीं डॉ. वैभव कांती को सेवा, ईमानदारी और संघर्ष की विरासत अपने परिवार से मिली। उनके पिता स्वर्गीय हरदेव जी सरकारी विद्यालय में शिक्षक थे और वर्ष 1980 से 1989 तक रसड़ा विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे। सादगी और ईमानदारी उनकी सबसे बड़ी पहचान थी। उनकी माता श्रीमती कौशल्या देवी ने कठिन से कठिन परिस्थितियों में परिवार को संभालते हुए बच्चों की शिक्षा को कभी प्रभावित नहीं होने दिया। छह संतानों में तीसरे स्थान पर और पांच भाइयों की इकलौती बहन रहीं वैभव कांती का बचपन गांव की सादगी और लखनऊ के शैक्षणिक माहौल के बीच बीता। गांव ने उन्हें संवेदनशील बनाया तो सिटी मॉन्टेसरी स्कूल ने अनुशासन, नेतृत्व और सेवा का संस्कार दिया।
वर्ष 1989 परिवार के लिए कठिन परीक्षा लेकर आया। पिता चुनाव हार गए, सरकारी आवास छोड़ना पड़ा और आर्थिक संकट सामने खड़ा हो गया। ऐसे समय में भी माता-पिता ने शिक्षा से समझौता नहीं किया। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने बिना किसी कोचिंग के स्वाध्याय के बल पर किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज (केजीएमसी), लखनऊ में एमबीबीएस में प्रवेश प्राप्त किया। उनका सपना पहले प्रशासनिक सेवा में जाने का था, लेकिन उन्होंने महसूस किया कि समाज की सबसे बड़ी सेवा चिकित्सा के माध्यम से की जा सकती है और वहीं से उनके जीवन की दिशा बदल गई।

वर्ष 2007 में एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज, मेरठ से प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ के रूप में चिकित्सकीय जीवन शुरू हुआ। वर्ष 2009 में उनका विवाह उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई के ऑर्थोपेडिक्स विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. सुनील कुमार से हुआ। विवाह के बाद सैफई उनकी कर्मभूमि बना। यहां विभागाध्यक्ष रहे स्वर्गीय डॉ. अरुण नागरथ के मार्गदर्शन में उन्होंने उच्च जोखिम गर्भावस्था, जटिल प्रसूति एवं स्त्री रोग शल्य चिकित्सा, लैप्रोस्कोपी, हिस्टेरोस्कोपी, इन्फर्टिलिटी, आईवीएफ और अल्ट्रासाउंड के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल की। उन्होंने केवल स्वयं को दक्ष चिकित्सक नहीं बनाया, बल्कि रेजिडेंट डॉक्टरों को भी आधुनिक चिकित्सा का प्रशिक्षण दिया।

वर्ष 2022 से 2024 तक उन्होंने एम्स रायबरेली में प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष के रूप में कार्य करते हुए सुरक्षित मातृत्व सेवाओं, उन्नत लैप्रोस्कोपिक एवं गायनेकोलॉजिकल सर्जरी, चिकित्सा शिक्षा और शोध को नई दिशा दी। वर्तमान में वह यूपीयूएमएस, सैफई में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं और ग्रामीण व आर्थिक रूप से कमजोर दंपतियों को अपने क्षेत्र में ही आधुनिक प्रजनन उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आईवीएफ एवं एआरटी सेंटर की स्थापना के प्रयासों का नेतृत्व कर रही हैं।
डॉ. वैभव कांती का कार्य केवल ऑपरेशन थिएटर तक सीमित नहीं है। उच्च जोखिम गर्भावस्था प्रबंधन, मिनिमली इनवेसिव सर्जरी, इन्फर्टिलिटी उपचार, चिकित्सा शिक्षा, रेजिडेंट प्रशिक्षण और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय शोध कार्यों में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। उनके लिए हर सफल प्रसव केवल चिकित्सकीय उपलब्धि नहीं, बल्कि एक परिवार की खुशियों की वापसी है।

लगातार गंभीर मरीजों, जटिल ऑपरेशनों और आपात परिस्थितियों के बीच काम करना किसी भी डॉक्टर के लिए आसान नहीं होता। कई बार मरीज को बचाने की पूरी कोशिश के बावजूद सफलता नहीं मिलती, जिसका दर्द डॉक्टर भी भीतर तक महसूस करता है। ऐसे क्षणों में परिवार उनका सबसे बड़ा संबल बनता है। उनके पति प्रो. डॉ. सुनील कुमार स्वयं वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक सर्जन हैं। दोनों एक-दूसरे की जिम्मेदारियों और मानसिक दबाव को समझते हैं। नियमित दिनचर्या, सकारात्मक सोच, निरंतर अध्ययन और मरीजों की मुस्कान ही उन्हें हर नए दिन फिर उसी ऊर्जा के साथ अस्पताल पहुंचने की प्रेरणा देती है।
डॉ. वैभव कांती का मानना है कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति उत्तरदायित्व है। उनका विश्वास है कि आधुनिक और सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवाएं हर महिला तक पहुंचनी चाहिए, चाहे वह किसी भी आर्थिक या सामाजिक पृष्ठभूमि से जुड़ी हो। यही सोच उन्हें हर दिन नए संकल्प के साथ काम करने की प्रेरणा देती है।

बलिया के एक छोटे से गांव से निकलकर देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों तक पहुंचने का उनका सफर इस बात का प्रमाण है कि संघर्ष रास्ता नहीं रोकता, बल्कि मंजिल तक पहुंचने की शक्ति देता है। आज वह केवल एक सफल स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ नहीं, बल्कि हजारों महिलाओं के विश्वास, सुरक्षित मातृत्व की उम्मीद और युवा चिकित्सकों के लिए प्रेरणा का सशक्त नाम हैं। यही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है।
