राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस विशेष-
हजारों बच्चों को नई जिंदगी देने वाले चिकित्सक, सैकड़ों डॉक्टरों के गुरु और चिकित्सा शिक्षा को नई दिशा देने वाले दूरदर्शी प्रशासक की कहानी
(लेखक : वी. पी. सिंह यादव सैफई -9058333340)
सैफई (इटावा) एक चिकित्सक का जीवन केवल ऑपरेशन थिएटर तक सीमित नहीं होता। मरीजों की पीड़ा, कठिन निर्णय, अनगिनत ऑपरेशन, शोध की चुनौतियां और नई पीढ़ी के डॉक्टरों को तैयार करने की जिम्मेदारी—इन सबके बीच वह स्वयं भी निरंतर सीखता और संघर्ष करता रहता है। राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस ऐसे ही समर्पित चिकित्सकों को नमन करने का अवसर है। उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (यूपीयूएमएस), सैफई के कुलपति प्रो. डॉ. अजय सिंह उन चुनिंदा चिकित्सकों में शामिल हैं, जिन्होंने बच्चों की हड्डियों के इलाज से लेकर चिकित्सा शिक्षा, शोध और संस्थान निर्माण तक अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।

पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक्स के विशेषज्ञ प्रो. अजय सिंह ने अपने चिकित्सकीय जीवन का अधिकांश समय उन बच्चों को समर्पित किया, जिनके लिए चलना-फिरना भी किसी सपने से कम नहीं था। जन्मजात अस्थि विकृतियां, क्लब फुट, परथेस डिजीज, जटिल फ्रैक्चर और ट्रॉमा जैसे गंभीर रोगों के उपचार में उन्होंने वर्षों तक काम किया। उनके लिए हर सफल सर्जरी केवल चिकित्सा उपलब्धि नहीं, बल्कि किसी बच्चे और उसके परिवार को नया जीवन देने का माध्यम रही।
चिकित्सा सेवा के साथ उन्होंने शिक्षा और अनुसंधान को समान महत्व दिया। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू), लखनऊ में लंबे समय तक अध्यापन और शोध के दौरान उन्होंने सैकड़ों युवा चिकित्सकों को प्रशिक्षित किया। बाद में चाइल्ड पीजीआई, नोएडा के निदेशक तथा एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी के रूप में संस्थान निर्माण, आधुनिक चिकित्सा सेवाओं के विस्तार और शोध संस्कृति को नई दिशा दी।

वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई के कुलपति के रूप में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के व्यापक विस्तार का नेतृत्व कर रहे हैं। प्रो. अजय सिंह का नाम देश के अग्रणी चिकित्सक-शोधकर्ताओं में गिना जाता है। उनके 213 से अधिक शोधपत्र प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में प्रकाशित हो चुके हैं। 10 चिकित्सा पुस्तकों का लेखन, तीन पेटेंट, अनेक पुस्तक अध्याय, दर्जनों शोध परियोजनाओं का नेतृत्व तथा बाल अस्थि रोगों से जुड़े कई नवाचार उनकी वैज्ञानिक सोच का प्रमाण हैं। चिकित्सा शिक्षा में वीडियो आधारित शिक्षण, एविडेंस बेस्ड मेडिसिन और शोध आधारित प्रशिक्षण को बढ़ावा देने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

चिकित्सा, शोध और शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें अब तक 69 राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। देश-विदेश के अनेक वैज्ञानिक सम्मेलनों में वह आमंत्रित वक्ता रहे हैं तथा विभिन्न प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थाओं से जुड़े हैं। लेकिन उनके निकट सहयोगियों के अनुसार, सम्मान से अधिक संतोष उन्हें तब मिलता है, जब कोई बच्चा सफल उपचार के बाद अपने पैरों पर चलकर अस्पताल से घर लौटता है।
लगातार जटिल सर्जरी, शोध और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं होता। प्रो. अजय सिंह का मानना है कि चिकित्सा में सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती। नियमित अध्ययन, शोध, अनुशासित दिनचर्या और मरीजों के प्रति संवेदनशीलता ही एक चिकित्सक की सबसे बड़ी ताकत है।

आज सैफई मेडिकल विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर की पहचान दिलाने की दिशा में उनका नेतृत्व नई संभावनाएं खोल रहा है। उनका सपना है कि यह संस्थान केवल प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के अग्रणी चिकित्सा शिक्षा, शोध और सुपर स्पेशियलिटी उपचार केंद्रों में शामिल हो। हजारों मरीजों का विश्वास, सैकड़ों डॉक्टरों का मार्गदर्शन और चिकित्सा विज्ञान को समर्पित उनका योगदान उन्हें केवल एक सफल चिकित्सक नहीं, बल्कि भारतीय चिकित्सा जगत के प्रेरक व्यक्तित्वों में स्थापित करता है।
