आगरा के कला कुटीर में दो दिवसीय महोत्सव सम्पन्न, देशभर से पहुंचे प्रतिभागियों ने कला, संस्कृति और संवाद के माध्यम से साझा किए जीवन के अनुभव
आगरा। शहर के कला कुटीर में आयोजित दो दिवसीय सांस्कृतिक महोत्सव ‘ताज के सात रंग-2026’ का रविवार को भावनात्मक माहौल के बीच समापन हो गया। यह आयोजन LGBTQ+ (क्वीयरक्वियर) समुदाय की पहचान, अभिव्यक्ति और प्रतिभा को समर्पित रहा, जिसमें उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों, लेखकों, कवियों, संगीतकारों, रंगकर्मियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। दो दिनों तक चले कार्यक्रम में कला, संस्कृति, साहित्य और संवाद के माध्यम से सामाजिक जागरूकता, समानता और सम्मान का संदेश दिया गया। इस आयोजन का विषय वस्तु ‘“देसी क्वीयर” क्या है?’ रहा।

कार्यक्रम की शुरुआत कोलंबियाई कवि ह्वान की कविताओं से हुई जिसमे उन्होंने प्रवासी, द्विभाषी और अमेरिका में बड़े होने के बारे में बात कीविभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुई। कला कुटीर का मंच उन लोगों की आवाज बना, जो अक्सर सामाजिक और पारिवारिक पूर्वाग्रहों के कारण अपनी पहचान खुलकर व्यक्त नहीं कर पाते। प्रतिभागियों ने बिना किसी झिझक के मंच से अपनी जीवन यात्रा, संघर्ष, उपलब्धियां और अनुभव साझा किए। शहर की क्वीयर विरासत को संजोए रखने वाली पिंकी पाराशर जी ने किन्नर समुदाय की कला के नायाब नमूने पेश किए।

कार्यक्रम तीन पीढ़ियों की क्वीयर अस्मिता का साक्षी बना जहाँ शहर के वृद्ध क्वीयर व्यक्तियों के साथ युवा क्वीयर व्यक्तियों ने मंच साझा किया। कई वक्ताओं ने बताया कि अपनी लैंगिक पहचान सामने आने के बाद उन्हें परिवार और समाज की अस्वीकार्यता का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी प्रतिभा के बल पर नई पहचान बनाई।
महोत्सव का सबसे महत्वपूर्ण पहलू विभिन्न विषयों पर हुई खुली परिचर्चाएं रहीं। इन चर्चाओं में मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक सहयोग, सामाजिक स्वीकार्यता, रोजगार, शिक्षा और समान अवसर जैसे विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। प्रतिभागियों ने कहा कि समाज में जागरूकता बढ़ने से स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई है, लेकिन अभी भी लोगों की सोच में व्यापक बदलाव की आवश्यकता है।

कार्यक्रम में संगीत, नृत्य, कविता, फिल्म स्क्रीनिंग, ओपन माइक, कला प्रदर्शनी और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को बांधे रखा। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से यह संदेश दिया कि प्रतिभा किसी पहचान की मोहताज नहीं होती। अवसर और सम्मान मिलने पर हर व्यक्ति समाज में सकारात्मक योगदान दे सकता है। कई प्रस्तुतियों में संघर्ष, आत्मविश्वास और उम्मीद की झलक दिखाई दी, जिन्हें दर्शकों ने खूब सराहा।

दूसरे दिन प्रतिभागियों ने फ़िरोज़ फिरोज खान के मकबरे से विरासत भ्रमण (हेरिटेज वॉक) किया। इसके माध्यम से आगरा की ऐतिहासिक क्वीयर धरोहर से जुड़ने के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का संदेश भी दिया गया। धृति और आमिर के निर्देशन में बुढ़िया के ताल में क्वीयर व्यक्तियों की ऐतिहासिक इमारतों में उपस्थिति और क्वीयर अस्मिता के अंतर्संबंधों को खोजती एक फ़िल्म की शूटिंग भी हुई। इसके बाद फिल्म शूट, संगीत, संवाद और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम में ग्रैमी पुरस्कार नामित अग्नेय, रंगकर्मी कात्यायिनी, सैंडी, बार्बी, सात्विक, कनक, आयशा, नैन्सी, नैना, किन्सी आदि कलाकारों ने अपने हुनर का प्रदर्शन किया।

महोत्सव में आए प्रतिभागियों का कहना था कि ऐसे आयोजन केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं होते, बल्कि समाज में संवाद और जागरूकता बढ़ाने का माध्यम बनते हैं। मंच पर कई लोगों ने खुलकर कहा कि यदि परिवार और समाज का सहयोग मिले तो LGBTQ+ समुदाय के लोग भी शिक्षा, कला, खेल, साहित्य और अन्य क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा के दम पर नई ऊंचाइयां हासिल कर सकते हैं।
आयोजक कलीम, अरहान अयान और सलोनी ने बताया कि ‘ताज के सात रंग’ महोत्सव का उद्देश्य LGBTQ+ समुदाय के लोगों के लिएको ऐसा सुरक्षित और सम्मानजनक मंच बनाना उपलब्ध कराना था, जहां वे बिना किसी भय या संकोच के अपनी प्रतिभा और विचारों को व्यक्त कर सकें। उनका कहना था कि कला और संस्कृति समाज में संवाद का सबसे प्रभावी माध्यम हैं।

इसलिए कार्यक्रम में संगीत, कविता, फिल्म, नृत्य, परिचर्चा और विरासत भ्रमण जैसी गतिविधियों को शामिल किया गया, ताकि समाज में संवेदनशीलता, आपसी सम्मान और स्वीकार्यता का सकारात्मक संदेश पहुंच सके। कार्यक्रम के अन्य आयोजक धर्मेश और धृति भी मौजूद रहे।

दो दिनों तक चले इस महोत्सव में कलाकारों की प्रस्तुतियों के साथ-साथ विचारों का भी खुला आदान-प्रदान हुआ। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि समाज में प्रत्येक व्यक्ति को उसकी पहचान से नहीं, बल्कि उसकी प्रतिभा, क्षमता और मानवीय मूल्यों के आधार पर सम्मान मिलना चाहिए। यही इस आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धि रही।
