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सैफई : अस्पतालों में इलाज सिर्फ दवाओं और मशीनों से नहीं होता, बल्कि मरीज को समय पर देखभाल, भरोसा और मानसिक संबल देने वाली नर्सिंग सेवाएं भी उपचार प्रक्रिया की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती हैं। मरीज के भर्ती होने से लेकर स्वस्थ होकर घर लौटने तक नर्सिंग स्टाफ हर पल उसके साथ खड़ा रहता है। अंतरराष्ट्रीय नर्सिंग दिवस पर उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई का नर्सिंग स्टाफ इसी सेवा, समर्पण और मानवीय संवेदना की मिसाल के रूप में सामने आता है। प्रदेश के प्रमुख सरकारी मेडिकल संस्थानों में शामिल सैफई मेडिकल विश्वविद्यालय में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। इटावा, मैनपुरी, फर्रुखाबाद, फिरोजाबाद, औरैया, कन्नौज, एटा, कासगंज सहित आसपास के कई जनपदों से आने वाले मरीजों के लिए यह संस्थान बड़ी स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बना हुआ है। विश्वविद्यालय में सामान्य वार्ड से लेकर ट्रॉमा सेंटर, आईसीयू, आपातकालीन सेवाएं, सुपर स्पेशियलिटी विभाग और ऑपरेशन थिएटर तक नर्सिंग स्टाफ की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है। विश्वविद्यालय में करीब 1300 नर्सिंग कर्मी तीन शिफ्टों में लगातार सेवाएं दे रहे हैं। अस्पताल में हर समय सैकड़ों मरीज भर्ती रहते हैं, जिनकी निगरानी, दवाओं का प्रबंधन, संक्रमण नियंत्रण, आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया और मरीजों की नियमित देखभाल की जिम्मेदारी नर्सिंग स्टाफ संभालता है। आधुनिक चिकित्सा प्रणाली में नर्सिंग सेवाओं का दायरा पहले की तुलना में काफी बढ़ा है और अब तकनीकी दक्षता के साथ मरीजों से संवाद और मानसिक सहयोग भी उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल हो गया है।
नर्सिंग सुपरिटेंडेंट रूपम दीक्षित ने कहा कि नर्सिंग सेवा में अनुशासन, धैर्य और संवेदनशीलता तीनों का संतुलन जरूरी है। सामान्य दिनों से लेकर आपातकालीन परिस्थितियों तक नर्सिंग स्टाफ हर समय अपनी जिम्मेदारियों के लिए तैयार रहता है।
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असिस्टेंट नर्सिंग सुपरिटेंडेंट बीना लकी मसीह ने कहा कि नर्सिंग सेवा केवल पेशा नहीं बल्कि मानवता की सबसे संवेदनशील जिम्मेदारियों में से एक है। मरीज अस्पताल में सबसे अधिक समय नर्सिंग स्टाफ के साथ बिताता है, इसलिए उसकी देखभाल में आत्मीयता और धैर्य बेहद जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में मरीजों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए नर्सिंग स्टाफ लगातार प्रशिक्षित है।
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असिस्टेंट नर्सिंग सुपरिटेंडेंट एग्नेस ने कहा कि वर्तमान समय में नर्सिंग सेवाएं केवल इंजेक्शन और दवाओं तक सीमित नहीं रह गई हैं। आईसीयू, क्रिटिकल केयर, इमरजेंसी और ऑपरेशन थिएटर में नर्सिंग स्टाफ को उच्च स्तर की तकनीकी दक्षता के साथ कार्य करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार ही एक अच्छी नर्स की सबसे बड़ी पहचान है।
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असिस्टेंट नर्सिंग सुपरिटेंडेंट स्वयंप्रभा ने कहा कि गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखना भी नर्सिंग सेवा का हिस्सा है। कई बार मरीज और उनके परिजन घबराहट की स्थिति में होते हैं, ऐसे समय में नर्सिंग स्टाफ उन्हें भरोसा देने का काम करता है।
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सीनियर नर्सिंग ऑफिसर प्रमोद शर्मा ने कहा कि अस्पताल में हर दिन नई चुनौतियां सामने आती हैं। आपातकालीन स्थिति में त्वरित निर्णय और समय पर प्रतिक्रिया मरीज की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मरीज के स्वस्थ होकर मुस्कुराते हुए घर लौटने से बड़ी खुशी नर्सिंग स्टाफ के लिए कोई नहीं होती।
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असिस्टेंट नर्सिंग सुपरिटेंडेंट रेखा यादव ने कहा कि अस्पताल में भर्ती प्रत्येक मरीज को परिवार के सदस्य की तरह देखभाल देने का प्रयास किया जाता है। कई मरीज लंबे समय तक भर्ती रहते हैं, ऐसे में उनके साथ भावनात्मक जुड़ाव भी बन जाता है।
अंतरराष्ट्रीय नर्सिंग दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से नर्सिंग स्टाफ के सेवा भाव और योगदान की सराहना की गई। कुलपति प्रो. डॉ. अजय सिंह, प्रतिकुलपति प्रो. डॉ. रमाकांत यादव, डीन मेडिकल प्रो. डॉ. आदेश कुमार, कुलसचिव दीपक बर्मा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. डॉ. एसपी सिंह एवं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अमित सिंह ने नर्सिंग कर्मियों को स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बताते हुए उनके कार्यों की सराहना की।
