सैफई : होली के बाद रंगों के दुष्प्रभाव से आंखों और त्वचा से जुड़ी समस्याएं बढ़ने लगी हैं। शुक्रवार को उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई की ओपीडी में मरीजों की भारी भीड़ रही। दिनभर विभिन्न विभागों की ओपीडी में मरीज उपचार के लिए पहुंचते रहे। कुल मिलाकर विश्वविद्यालय की ओपीडी में करीब 2700 मरीजों ने पंजीकरण कराकर उपचार कराया, जिनमें बड़ी संख्या आंखों में जलन, एलर्जी, वायरल फीवर, बुखार, सर्दी-जुकाम और त्वचा संबंधी शिकायतों वाले मरीजों की रही।
होली के बाद सबसे ज्यादा असर नेत्र रोग विभाग की ओपीडी में देखने को मिला। नेत्र रोग विभाग के कक्ष संख्या 29 में करीब 190 मरीज पहुंचे, जिनमें कई मरीज आंखों में रंग चले जाने, जलन, लालिमा और पानी आने की शिकायत लेकर पहुंचे। चिकित्सकों ने सभी मरीजों की जांच कर दवा दी और आवश्यक परामर्श भी दिया।
नेत्र रोग विभाग में तैनात डॉ. अहमद हुसैन (एमबीबीएस, एमएस-नेत्र रोग, पीडीसीसी), सहायक प्रोफेसर ने बताया कि होली के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले कई रंगों में रासायनिक तत्व होते हैं, जो आंखों और त्वचा के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं। इन दिनों आंखों में रंग जाने, एलर्जी, जलन और संक्रमण की शिकायत लेकर मरीज लगातार आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि ज्यादातर मामलों में समय पर उपचार मिलने से मरीजों को राहत मिल रही है, लेकिन लापरवाही बरतने पर संक्रमण बढ़ सकता है।
ओपीडी में पहुंचे मरीज रघुवीर ने बताया कि होली खेलते समय बच्चों ने उनके चेहरे पर रंग लगा दिया था, जो आंखों में चला गया। इसके बाद आंखों में तेज जलन और पानी आने लगा, जिसके कारण वह जांच कराने विश्वविद्यालय आए। यहां डॉक्टर ने आंख की जांच कर दवा दी है।
इसी तरह सरोजिनी देवी ने बताया कि होली के दौरान अचानक रंग उनकी आंख में चला गया था, जिससे आंखों में तेज जलन शुरू हो गई। परेशानी बढ़ने पर वह उपचार के लिए सैफई आईं। यहां चिकित्सक ने आंख की जांच कर इलाज शुरू कर दिया है और दवाएं दी हैं।
इधर सामान्य ओपीडी में भी वायरल फीवर, बुखार, सर्दी-जुकाम और मौसमी संक्रमण से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ी हुई रही। चिकित्सकों के अनुसार मौसम में उतार-चढ़ाव और होली के दौरान खानपान में बदलाव के कारण भी कई लोग बीमार पड़ रहे हैं।
चिकित्सक की सलाह-
डॉ. अहमद हुसैन ने बताया कि यदि आंखों में रंग चला जाए तो उसे रगड़ने की बजाय तुरंत साफ पानी से धोना चाहिए। आंखों में जलन या दर्द होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है। उन्होंने सलाह दी कि होली खेलने के दौरान आंखों की सुरक्षा का ध्यान रखें और रासायनिक रंगों से बचें, ताकि आंखों और त्वचा को नुकसान से बचाया जा सके।
