(वी पी सिंह यादव सैफई)
सैफई : होली के रंगों के बीच सैफई से इस बार केवल उत्सव का संदेश नहीं गया, बल्कि 2027 की सत्ता की लड़ाई का औपचारिक शंखनाद भी हुआ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने साफ शब्दों में कहा कि सरकार बनाने का रास्ता सैफई से ही खुलेगा।
यह वाक्य महज भावनात्मक संबोधन नहीं था, बल्कि अपने परंपरागत गढ़ से पूरे प्रदेश की राजनीतिक दिशा तय करने का संकेत था। शब्द संयमित थे लेकिन लक्ष्य स्पष्ट अब तक की जीत से बड़ी जीत और सत्ता की वापसी।
अखिलेश यादव ने कहा कि त्योहार केवल मेल-मिलाप का अवसर नहीं, संकल्प का समय भी होते हैं। उन्होंने 2012 की याद दिलाई, जब होली के बाद प्रदेश में समाजवादी सरकार बनी थी। यह संदर्भ भावनात्मक नहीं, रणनीतिक था। उन्होंने कार्यकर्ताओं को याद दिलाया कि प्रदेश में 403 विधानसभा सीटें हैं और समय सीमित है। तैयारी जितनी गहरी होगी, परिणाम उतना व्यापक होगा।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार बनाने का रास्ता सैफई से ही शुरू होता है। यह वाक्य स्थानीय विश्वास को प्रदेशव्यापी लक्ष्य से जोड़ने की कोशिश था। उन्होंने यह भी कहा कि सैफई और आसपास के लोग समाजवादी विचारधारा से जुड़े रहे हैं और यहां से हमेशा बड़ी जीत मिली है। लेकिन इस बार लक्ष्य केवल जीत नहीं, रिकॉर्ड जीत होना चाहिए। उनका संकेत था कि मजबूत गढ़ केवल प्रतीक न रहे, बल्कि अभियान का संचालन केंद्र बने। संबोधन का दूसरा पक्ष वैश्विक परिदृश्य से जुड़ा था। दुनिया के कई हिस्सों में जारी युद्ध, मिसाइलों और बमबारी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा समय पहले नहीं देखा गया जब हर घटना की जानकारी तुरंत मिल जाती हो। उन्होंने ताकतवर देशों की आक्रामक नीतियों पर इशारा किया और कहा कि अस्थिर दुनिया में भारत को संतुलित और शांति आधारित नीति अपनानी चाहिए। समाजवादी विचारधारा को उन्होंने स्पष्ट रूप से युद्ध विरोधी बताया और महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा के मार्ग का उल्लेख किया। देश की विदेश नीति और रक्षा तैयारियों पर उन्होंने सवाल उठाए। उनका कहना था कि यदि दुनिया में तनाव बढ़ रहा है तो देश को आत्मनिर्भर रक्षा व्यवस्था पर गंभीरता से काम करना होगा। केवल समझौते और घोषणाएं पर्याप्त नहीं होंगी। यह टिप्पणी केवल अंतरराष्ट्रीय संदर्भ नहीं थी, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रश्न को राजनीतिक विमर्श में लाने का प्रयास भी था। प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर बोलते हुए उन्होंने महंगाई, सोना-चांदी की कीमतों, आलू किसानों की स्थिति और रोजगार संकट का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब आम नागरिक महंगाई से दबाव में है और युवा रोजगार के लिए भटक रहा है, तब विकास के बड़े दावे जनता को संतुष्ट नहीं कर सकते। उन्होंने निवेश समझौतों और विदेश यात्राओं का जिक्र करते हुए कहा कि आंकड़ों की चमक से जमीन की सच्चाई नहीं बदलती। पीडीए को उन्होंने केवल चुनावी नारा नहीं, सामाजिक भागीदारी की रचना बताया। उनका कहना था कि जो भी पीड़ित, उपेक्षित या अपमानित है, समाजवादी पार्टी उसके साथ खड़ी रहेगी। सामाजिक सम्मान और हिस्सेदारी को उन्होंने आगामी चुनाव की धुरी के रूप में प्रस्तुत किया। संतों से जुड़े विवादों का उल्लेख कर उन्होंने संकेत दिया कि आस्था और न्याय का प्रश्न भी राजनीतिक विमर्श में रहेगा। संगठन की तैयारी पर उनका जोर सबसे स्पष्ट था। उन्होंने कहा कि बिना प्रशिक्षण और अनुशासन के बड़ी लड़ाई नहीं जीती जा सकती। इटावा से पीडीए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा कर उन्होंने बताया कि 2027 की तैयारी केवल भाषण से नहीं, संरचित संगठनात्मक अभ्यास से होगी। यह संकेत था कि पार्टी भीड़ से आगे बढ़कर कैडर आधारित ढांचे को मजबूत करना चाहती है। पूरे संबोधन का सार यह था कि 2027 को केवल चुनाव न माना जाए, बल्कि वैचारिक और सामाजिक संघर्ष के रूप में देखा जाए। सैफई को उन्होंने प्रतीक के रूप में सामने रखा एक ऐसा केंद्र जहां से ऊर्जा, संदेश और रणनीति तीनों निकलें। होली के रंगों के बीच दिया गया यह 25 मिनट का वक्तव्य बताता है कि समाजवादी पार्टी अब लक्ष्य तय कर चुकी है। यदि सैफई से उठी यह आवाज बूथ तक पहुंची और सामाजिक समीकरणों को संगठित कर पाई, तो 2027 की राजनीति में इसका असर निर्णायक हो सकता है।
