सांस रोगियों की बढ़ी परेशानी, रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में सबसे अधिक दबाव; चिकित्सकों ने ठंड से बचाव की दी सलाह
सैफई : कड़ाके की ठंड और शीतलहर के प्रकोप के बीच सोमवार को उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई की ओपीडी में मरीजों का भारी दबाव देखने को मिला। शनिवार और रविवार की छुट्टी के बाद जैसे ही सोमवार को ओपीडी खुली, सुबह से ही इलाज के लिए मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी। ठंड बढ़ने के साथ सांस से जुड़ी बीमारियों के मरीज सबसे अधिक नजर आए।

सोमवार को विश्वविद्यालय की मुख्य ओपीडी के साथ 500 बेड सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की ओपीडी को मिलाकर कुल करीब 3500 मरीजों ने पंजीकरण कराया। इनमें बड़ी संख्या ऐसे मरीजों की रही, जो खांसी, सांस फूलने, दमा, सीने में जकड़न और एलर्जी की शिकायत लेकर पहुंचे थे। सबसे अधिक दबाव रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग की ओपीडी पर देखा गया। रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग की ओपीडी, कमरा नंबर 27 के बाहर सुबह से ही मरीजों की लंबी कतारें लगी रहीं। बुजुर्गों और पहले से सांस की बीमारी से पीड़ित मरीजों की संख्या 180 से अधिक रही। रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभागाध्यक्ष एवं डीन मेडिकल प्रोफेसर डॉक्टर आदेश कुमार तथा वरिष्ठ चिकित्सक डॉक्टर आशीष कुमार गुप्ता ने अपनी टीम के साथ लगातार मरीजों को देखा। भीड़ अधिक होने के बावजूद मरीजों की क्रमवार जांच की गई और आवश्यकता के अनुसार दवाएं व जरूरी जांचें लिखी गईं।
कई मरीज ऐसे भी सामने आए, जिनकी हालत ठंड के कारण अचानक बिगड़ गई थी और उन्हें तत्काल चिकित्सकीय सलाह दी गई। चिकित्सकों के अनुसार लगातार गिरता तापमान, कोहरा और ठंडी हवा फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों को तेजी से बढ़ा रही है। दमा, सीओपीडी और एलर्जी के मरीजों में ठंड के कारण लक्षण अधिक गंभीर हो रहे हैं। सोमवार को ओपीडी में पहुंचे अधिकांश मरीजों ने रात के समय सांस लेने में ज्यादा परेशानी होने की शिकायत बताई।
प्रो. डॉक्टर आदेश कुमार ने मरीजों को ठंड से बचाव को लेकर विशेष सावधानियां अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सर्द मौसम में सुबह जल्दी और देर शाम बाहर निकलने से बचें, शरीर को ऊनी कपड़ों से पूरी तरह ढककर रखें और ठंडी हवा के सीधे संपर्क से बचाव करें। सांस रोगियों को नियमित रूप से दवाओं का सेवन करने, इनहेलर का सही तरीके से उपयोग करने और बिना चिकित्सकीय परामर्श के दवा बंद न करने की सलाह दी गई।
मरीजों का कहना था कि ठंड बढ़ने के साथ सांस लेने में दिक्कत, खांसी और सीने में भारीपन की समस्या बढ़ गई थी, जिस कारण उन्हें विश्वविद्यालय की ओपीडी में आना पड़ा।
