सैफई : उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई में जन्मजात पैर की विकृति क्लबफुट (टेढ़े पैर) के प्रभावी इलाज को लेकर शनिवार को एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। अस्थि रोग विभाग द्वारा क्योर इंटरनेशनल इंडिया ट्रस्ट के सहयोग से आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों और जिलों से आए 100 से अधिक अस्थि रोग विशेषज्ञों को क्लबफुट की पहचान और पोंसेटी तकनीक से उसके उपचार की विधि का प्रशिक्षण दिया गया।

कार्यशाला का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) अजय सिंह ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि क्लबफुट जैसी जन्मजात विकृति की समय पर पहचान और उपचार से बच्चों को सामान्य जीवन दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि जन्म के समय ही इस विकृति की पहचान हो जाए और तुरंत उपचार शुरू कर दिया जाए तो अधिकांश मामलों में केवल प्लास्टर के माध्यम से ही पैर को ठीक किया जा सकता है। उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं के स्तर पर भी इस विषय में प्रशिक्षण और जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता बताई।

कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त क्लबफुट विशेषज्ञ डॉ. मैथ्यू वर्गीज (सेंट स्टीफन अस्पताल, नई दिल्ली) मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उन्होंने पोंसेटी विधि को क्लबफुट के इलाज की सरल, सुरक्षित और प्रभावी तकनीक बताते हुए कहा कि यदि बच्चे का उपचार समय से शुरू हो जाए तो 95 प्रतिशत से अधिक मामलों में केवल प्लास्टर से ही पैर पूरी तरह ठीक हो जाता है, जबकि बहुत कम मामलों में शल्यक्रिया की आवश्यकता पड़ती है।

कार्यशाला में बाल अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेश चंद (किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ), डॉ. सौरभ सिन्हा (भोपाल) और डॉ. सुमित गुप्ता (लेडी हार्डिंग चिकित्सा महाविद्यालय, नई दिल्ली) ने भी प्रतिभागियों को क्लबफुट प्रबंधन की आधुनिक विधियों की जानकारी दी। प्रशिक्षण सत्रों में क्लबफुट की शीघ्र पहचान, पोंसेटी प्लास्टर तकनीक और उपचार के बाद देखभाल की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। अस्थि रोग विभागाध्यक्ष प्रो.डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि लगभग हर 1000 नवजात शिशुओं में से एक बच्चे में क्लबफुट की समस्या पाई जाती है, जिसमें एक या दोनों पैर टेढ़े होते हैं। पहले इस विकृति को ठीक करने के लिए विभिन्न प्रकार की शल्यक्रियाएं करनी पड़ती थीं, लेकिन अब पोंसेटी तकनीक के माध्यम से बिना ऑपरेशन, बिना चीरा और बिना जटिलताओं के उपचार संभव हो गया है।

कार्यक्रम में प्रो.डॉ. हरीश कुमार ने प्रतिभागियों को क्लबफुट की गंभीरता का आकलन करने के लिए प्रयुक्त पिरानी स्कोरिंग प्रणाली के बारे में विस्तार से जानकारी दी।इस दौरान क्योर इंटरनेशनल इंडिया ट्रस्ट और उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर भी किए गए। इसके तहत क्लबफुट और अन्य अंग विकृतियों से पीड़ित बच्चों का निःशुल्क उपचार विश्वविद्यालय के अस्थि रोग विभाग में किया जाएगा।

कार्यक्रम के संचालन और समन्वय में सह-आयोजन सचिव डॉ. ऋषभ अग्रवाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम प्रति कुलपति प्रो.डॉ. रामाकांत यादव,डीन मेडिकल प्रो.डॉ. आदेश कुमार, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एस.पी. सिंह, कुलसचिव दीपक वर्मा तथा चिकित्सा अधीक्षक प्रो.डॉ. अमित सिंह आदि का आयोजन सचिव डॉ. राजीव कुमार ने अतिथियों, विशेषज्ञों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
