सैफई :मिर्गी कोई लाइलाज बीमारी नहीं, बल्कि पूरी तरह उपचार योग्य है। लोगों की सबसे बड़ी गलती यह है कि वे दौरे की स्थिति में डॉक्टर के पास न जाकर अंधविश्वास और झाड़-फूंक में उलझ जाते हैं,उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) अजय सिंह ने यह बातें मंगलवार को विश्वविद्यालय में न्यूरोलॉजी विभाग के तत्वाधान में राष्ट्रीय मिर्गी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में कहीं। उन्होंने कहा कि समय पर इलाज, नियमित दवा और विशेषज्ञ की निगरानी में मरीज बिल्कुल सामान्य जीवन जी सकते हैं।

कार्यक्रम में न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष एवं प्रति कुलपति प्रो. (डॉ.) रमाकांत यादव ने बताया कि संस्थान में मिर्गी रोग के लिए सभी उन्नत जांचें ईईजी, एमआरआई, दीर्घकालिक मॉनिटरिंग तथा आपातकालीन प्रबंधन की पूरी सुविधा उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि मरीजों को हर स्थिति में दवा नियमित रूप से लेनी चाहिए, क्योंकि उपचार में लापरवाही दौरे बढ़ाने का प्रमुख कारण बनती है। विशेषज्ञों ने बताया कि समाज में फैली गलत धारणाएं लोगों को इलाज से दूर कर देती हैं। मिर्गी न तो छूत की बीमारी है और न ही इससे मानसिक क्षमता प्रभावित होती है। भ्रांतियों के कारण लोग टोना-टोटका और झाड़-फूंक का सहारा ले लेते हैं, जबकि उपचार का एकमात्र सही तरीका न्यूरोलॉजिस्ट की सलाह है।

कार्यक्रम के दौरान डॉक्टरों ने मिर्गी में पालन किए जाने वाले सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को एक साथ रखते हुए कहा कि मरीज पर दौरे के दौरान न तो झाड़-फूंक करें, न पकड़ें, न उसके मुंह में कोई वस्तु डालें। बिना डॉक्टर की सलाह दवा बंद न करें और न ही दौरे के तुरंत बाद पानी या भोजन दें। अनियंत्रित दौरे वाले मरीजों को आग, पानी या ऊंचाई से जुड़ी जोखिम भरी गतिविधियों से दूर रहना चाहिए। नशीले पदार्थों और अत्यधिक शराब से परहेज अत्यंत आवश्यक है। लंबे समय तक दौरा चलने पर तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता आवश्यक है।

इसके साथ ही यह भी बताया गया कि मिर्गी में नियमित नींद, समय पर दवा, संतुलित भोजन, योग एवं ध्यान, तनाव कम करने। परिवार और सहकर्मियों को दौरे की स्थिति में प्राथमिक उपचार— जैसे मरीज को करवट से लिटाना, सिर के नीचे मुलायम वस्तु रखना और वायुमार्ग खुला रखना— सिखाया जाना चाहिए। दैनिक गतिविधियों में सुरक्षा उपाय, जैसे खेलते समय हेलमेट पहनना और अकेले तैरने-नहाने से बचना बेहद जरूरी है।
न्यूरोलॉजी विभाग की टीम ने बताया कि आने वाले दिनों में विश्वविद्यालय द्वारा स्कूलों, कॉलेजों और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, जिसके माध्यम से लोगों को मिर्गी के प्राथमिक प्रबंधन, सुरक्षा उपायों और आधुनिक उपचार संबंधी सभी जानकारी दी जाएगी।
इस मौके पर डीन मेडिकल प्रोफेसर डॉक्टर आदेश कुमार, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर डॉक्टर एसपी सिंह,चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर डॉक्टर अमित सिंह,आदि मौजूद रहे।
