सैफई : उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई के अस्थि रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. हरीश कुमार को राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान अकादमी की प्रतिष्ठित सदस्यता एनए.एम.एस. चंडीगढ़ में प्रदान की गई। फिजियोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. कीर्ति जैसवाल का भी इस सदस्यता के लिए चयन हुआ है। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और शोध क्षमता को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाती है।

चंडीगढ़ में आयोजित राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान अकादमी के 65वें वार्षिक सम्मेलन के दौरान यह सम्मान प्रदान किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हरियाणा के महामहिम राज्यपाल प्रोफेसर आशिम कुमार घोष थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में नीति आयोग के सदस्य डॉ. विनोद कुमार पॉल उपस्थित रहे। मंच पर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के अध्यक्ष डॉ. अभिजात सी. सेठ एवं भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के पूर्व महानिदेशक डॉ. वी.एम. कटोच भी मौजूद रहे।
राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान अकादमी की यह सदस्यता उन चिकित्सकों को दी जाती है जो चिकित्सा विज्ञान में शोध, वैज्ञानिक लेखन और शैक्षणिक उत्कृष्टता के माध्यम से विशेष योगदान देते हैं।

सदस्यता के लिए चयन प्रक्रिया सहकर्मी मूल्यांकन पर आधारित होती है, जिसमें उम्मीदवार के वैज्ञानिक कार्यों, शोध निष्कर्षों और विभिन्न समितियों में सहभागिता का विस्तृत परीक्षण किया जाता है।
अस्थि रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. हरीश कुमार को यह सम्मान आर्थोपेडिक विशेषज्ञता, निरंतर शोध कार्य, उच्चस्तरीय प्रकाशनों और चिकित्सा शिक्षा में सक्रिय योगदान के आधार पर मिला है। यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत सम्मान है, बल्कि सैफई में स्थापित विश्वविद्यालय की चिकित्सा उत्कृष्टता का भी प्रमाण है।

सम्मान प्राप्त कर सैफई लौटने के बाद डॉ. हरीश कुमार ने कुलपति प्रोफेसर डॉ. अजय सिंह से मुलाकात की। कुलपति ने उन्हें बधाई देते हुए सम्मान पत्र का अवलोकन किया और समारोह के दौरान साझा की गई तस्वीर को देखकर प्रसन्नता व्यक्त की। कुलपति ने कहा कि यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता और शोध कार्यों को नई दिशा देगी।

अस्थि रोग विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. सुनील कुमार ने भी डॉ. हरीश को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सम्मान विभाग के लिए प्रेरणादायक है और इससे युवा चिकित्सकों में शोध के प्रति उत्साह बढ़ेगा।
