सैफई: हैवरा कोठी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन सती, ध्रुव, पृथु-अर्ची और जड़भरत के प्रेरक प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को यह संदेश दिया गया कि जीवन की विपरीत परिस्थितियां मनुष्य को तोड़ने के लिए नहीं, बल्कि उसे तपाकर मजबूत बनाने के लिए आती हैं। अपमान को प्रेरणा, मोह को वैराग्य और कठिनाई को संकल्प में बदलने वाला ही आध्यात्मिक ऊंचाई प्राप्त करता है। इसी संदेश के साथ कथा पंडाल दिनभर भक्ति, आस्था और जयघोष से गुंजायमान रहा। कथा व्यास स्वामी प्रणवपुरी जी महाराज ने कहा कि भागवत कथा आत्मजागरण का माध्यम है। सती चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि धर्म और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए त्याग की भावना आवश्यक है। जब व्यक्ति अपने सिद्धांतों पर अडिग रहता है, तभी उसका जीवन सार्थक बनता है।
ध्रुव चरित्र का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि यह दृढ़ निश्चय की विजय का प्रतीक है। माता सुरुचि द्वारा गोद में न बैठने देने के अपमान को बालक ध्रुव ने कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि उसे भगवान नारायण की प्राप्ति का संकल्प बना लिया। कठोर तपस्या, अटूट विश्वास और निस्वार्थ भक्ति के बल पर उन्होंने ध्रुव पद प्राप्त किया, जो आज भी अटलता का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने कहा कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मन में अडिग संकल्प हो तो असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं।
पृथु-अर्ची प्रसंग के माध्यम से कथा व्यास ने आदर्श शासन, कर्तव्यपरायणता और दांपत्य जीवन के मूल्यों को रेखांकित किया। वहीं जड़भरत चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने सांसारिक मोह-माया से सावधान रहने और आत्मकल्याण के लिए वैराग्य अपनाने की प्रेरणा दी।
कथा के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भक्ति में लीन नजर आए। कई बार पंडाल जयकारों से गूंज उठा। आयोजन समिति के अनुसार चौथे दिन भगवान श्रीकृष्ण जन्म की पावन कथा सुनाई जाएगी, जिसे लेकर विशेष उत्साह और तैयारियां देखी जा रही हैं।
