सैफई: हैवरा कोठी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन रात्रि में आयोजित भव्य भजन संध्या ने पूरे क्षेत्र को भक्ति रस में डुबो दिया। भगवान श्रीकृष्ण और राधे नाम के संकीर्तन से कथा पंडाल देर रात तक गुंजायमान रहा। श्रद्धालु हाथ उठाकर भजनों पर झूमते नजर आए और वातावरण पूर्णतः आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो गया।

वृंदावन से पधारे आचार्य राधे जी महाराज एवं उनकी टीम ने मधुर भजनों की श्रृंखला प्रस्तुत की। “राधे-राधे” के संकीर्तन से प्रारंभ हुई भजन संध्या में कृष्ण लीला और भक्ति पर आधारित कई भजनों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। ढोलक, हारमोनियम और झांझ की संगत ने कार्यक्रम को संगीतमय गरिमा प्रदान की। बीच-बीच में आचार्य राधे जी महाराज ने भक्ति का महत्व बताते हुए कहा कि कलियुग में नाम जप ही सबसे सहज साधना है, जो मन को निर्मल और जीवन को सार्थक बनाती है।
इससे पूर्व दिन में कथा व्यास परम पूज्य भागवताचार्य स्वामी प्रणवपुरी जी महाराज ने गोवर्धन धारण, कालिया नाग दमन और छप्पन भोग प्रसंग का सारगर्भित वर्णन किया। उन्होंने बताया कि गोवर्धन लीला प्रकृति संरक्षण और अहंकार त्याग का संदेश देती है, जबकि कालिया दमन अधर्म और नकारात्मकता के अंत का प्रतीक है। उनकी ओजस्वी वाणी और सहज व्याख्या शैली से श्रद्धालु निरंतर आध्यात्मिक ज्ञान अर्जित कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ था। कथा प्रतिदिन निर्धारित समयानुसार आयोजित की जा रही है और आगामी दिवसों तक निरंतर जारी रहेगी। स्वामी प्रणवपुरी जी महाराज प्रारंभ से ही नियमित रूप से कथा का वाचन कर रहे हैं और विभिन्न आध्यात्मिक प्रसंगों के माध्यम से धर्म, प्रेम और सदाचार का संदेश दे रहे हैं।
भजन संध्या में क्षेत्र के गणमान्य लोग और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। अंत में सामूहिक आरती और प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। पांचवें दिन की यह संगीतमय प्रस्तुति कथा के आध्यात्मिक प्रवाह को और अधिक प्रखर बना गई
