सैफई : उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई के कुलपति प्रोफेसर डॉ. अजय सिंह ने कहा कि इलाज के दौरान नस के जरिए दवा या तरल पदार्थ देने की प्रक्रिया (इन्फ्यूजन/ड्रिप) में की गई छोटी-सी चूक भी मरीज की जान के लिए जोखिम बन सकती है। इसलिए अस्पतालों में इलाज के साथ-साथ रोगी सुरक्षा, देखभाल की गुणवत्ता और मानवीय संवेदनशीलता को सर्वोच्च प्राथमिकता देना आवश्यक है। वह पैलेटिव मेडिसिन यूनिट की ओर से आयोजित एडवांस्ड इन्फ्यूजन मैनेजमेंट विषयक दो दिवसीय कार्यशाला के समापन अवसर पर बोल रहे थे।

कुलपति ने कहा कि जब कोई मरीज अस्पताल से घर लौटता है, तो वह सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि उसे मिली देखभाल और सुरक्षा व्यवस्था को भी याद रखता है। इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम मरीज के अनुभव को बेहतर बनाने के साथ-साथ अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि को कम करने में भी सहायक होते हैं।
उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय की पैलेटिव मेडिसिन यूनिट द्वारा 22 और 23 दिसंबर को आयोजित यह कार्यशाला विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार इंट्रावेनस इन्फ्यूजन यानी नस के माध्यम से दवा या तरल देने की प्रक्रिया के सुरक्षित प्रबंधन पर केंद्रित रही। कार्यशाला का उद्देश्य नर्सिंग स्टाफ, तकनीशियन और इंटर्न्स को ड्रिप से संबंधित संभावित त्रुटियों, संक्रमण के जोखिम और दवा की गलत मात्रा जैसी समस्याओं से बचाव के लिए प्रशिक्षित करना रहा।

कार्यशाला के आयोजन अध्यक्ष, चिकित्सा अधीक्षक एवं पैलेटिव मेडिसिन यूनिट के चेयरमैन डॉ. अमित सिंह ने कहा कि सुरक्षित, मानकीकृत और वैज्ञानिक तरीके से ड्रिप देना गुणवत्तापूर्ण रोगी देखभाल की बुनियाद है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम विश्वविद्यालय में मरीजों की सुरक्षा को लेकर मजबूत प्रणाली विकसित करेंगे।
आयोजन सचिव, उप चिकित्सा अधीक्षक एवं पैलेटिव मेडिसिन यूनिट के नोडल अधिकारी डॉ. हिमांशु प्रिंस ने कहा कि कुलपति के मार्गदर्शन और सहयोग से यह कार्यशाला सफल हो सकी। इससे विश्वविद्यालय में सुरक्षित, मानक आधारित और मरीज-केंद्रित इन्फ्यूजन (ड्रिप) प्रैक्टिस को मजबूती मिलेगी।
